शिव ही, शिव है
-श्रीमती प्रीति कौशिक
शिव तत्व मेरे लिए केवल एक आध्यात्मिक विषय नहीं, बल्कि आत्मज्ञान की यात्रा का मार्गदर्शक है। इसी अनुभूति को शब्दों में ढालना मेरा उद्देश्य है। क्यूंकि शिव केवल देव नहीं, चेतना हैं — एक ऐसा अनुभव जिसे समझना और साझा करना मैंने अपना कर्तव्य समझा। आज के व्यस्त और भ्रमित समय में शिव तत्व हमें स्थिरता, मौन और अंतरात्मा से जुड़ने की प्रेरणा देता है — इसी शांति की खोज में मैंने लेखन का माध्यम चुना। शिव मेरे भीतर की मौन चेतना हैं, जिनका स्पर्श मैंने अनुभव किया — और यही अनुभव मैं अपने लेखन से सब तक पहुँचाना चाहती हूं । शिव तत्व पर लिखना, स्वयं को लिखना है — क्योंकि शिव भीतर हैं, बाहर नहीं। जब शब्द मौन से मिलने लगें, तो शिव प्रकट होते हैं — मेरा लेखन उसी मौन की साधना है।

शिव ही, शिव है| शिव ही, शिव है||
अंत भी शिव है , आरम्भ भी शिव है,
अनंत भी शिव है, शून्य भी शिव है|
शिव ही, शिव है| शिव ही, शिव है||
मैं भी शिव, तू भी शिव है ,
आज भी शिव है, कल भी शिव है|
शिव ही, शिव है| शिव ही, शिव है||
शव में भी शिव है, जीव में भी शिव है,
जीने की कला भी शिव है, मृत्यु का आभास भी शिव है|
शिव ही, शिव है| शिव ही, शिव है||
अंदर भी शिव है, बाहर भी शिव है,
सतयुग से कलयुग तक शिव ही शिव है|
शिव ही, शिव है| शिव ही, शिव है||
Ms. Preeti Kaushik, Office Assistant, Kuruom School of Advanced Sciences, Lucknow
पवन साधक
शिव एक नाद है, एक तत्व है
Manju
Shiv stya h, har har mahadev
Ati sunder panktiya hain
Bal Ram Singh
शिव की शक्ति शिव भक्ति से ओतप्रोत है प्रीती कृति!
Deepika kaushik
आदि अंनंत शिव योगी आदित्यनाथ शिव ओं नंम
शिवाय
Dr. Aparna Dhir
अद्भुत लेख, परम सत्य
SHEELA
मुझे अध्यात्म के बारे में ज्यादा ज्ञान नहीं है, लेकिन इतना जरूर मानती हूं कि शिव ही आरंभ हैं और शिव ही अंत हैं। वे ही एक ऐसे तत्व हैं जो अजरने, अभेद्य और अनंत हैं – जो समस्त सृष्टि का आधार हैं.
Pravesh Kaushik
भगवान शिव के प्रयह एक साधारण लेकिन गहरा अर्थ रखने वाला, भगवान शिव के प्रति सम्मान है। हर हर महादेव एक प्रसिद्ध उद्घोष है जो भगवान शिव की महिमा का गुणगान करता है।
Sheela
Bhut hi sundar likha hai bilkul satya hai
Komal
“यह लेख भगवान शिव के विषय में अत्यंत ज्ञानवर्धक और भावनात्मक रूप से समृद्ध है। लेख में शिव के विविध स्वरूपों और उनके आध्यात्मिक महत्व को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है। भाषा सरल एवं प्रभावशाली है, जिससे पाठक भावनात्मक रूप से जुड़ पाते हैं। यदि लेख में कुछ और शास्त्रीय संदर्भ या उद्धरण जोड़े जाएँ तो इसकी गहराई और भी बढ़ सकती है। कुल मिलाकर यह एक बहुत ही प्रेरणादायक और सारगर्भित लेख है।”